नागरिकता विधेयक (लघुकथा)


नागरिकता विधेयक (लघुकथा)
लामो समयसम्म प्रेम सम्बन्धमा रहेपछि मुन्नाले मुन्नीलाई भन्यो, “मुन्नी अब हमार तोहारसे कौनो सम्बन्ध नाहीं । तु अपनी रस्ते, हम् अपन ।
चाहो तो तु खुदकी मर्जीसे शादी-ब्याह करले ।”
अब हमार घरमे बहु बनकर कोही आसकत है तो ओ बिहार और उत्तर प्रदेशसे होखेली, और वोह भी पुरे दहेजके साथ, जानली ?

सपनामा पनि नदेखेको कुराले मुन्नी स्तब्ध भई । “काहे ? मेरेमे का कमी बा? पहले तो तु हर बखत हमार आगे पिछे आगे पिछे मुन्नी मेरी जान कहते फिरल रहल अब का होईगवा, कि हमरासे तोहार मन भर गईल?”

“ए लौण्डिया कौन भागत रहल तोहार पिछे? जिधर फूल फुलेला, उधर भमर तो जाइबेकरी! जानली? यी बात सच ह कि तु पहले मेरेको निमन लगती लेकिन अब नाहीँ ।”

“काहेको? मेरे थोफडेमे तेजाबकी सीसी फुटलबा का?” मुन्नीले रुँदै भनी ।

“ना , ना , ना ! उसके सामने तो तेजाब भी कुछो नाहीं ! तु जानती नही? यी मधेसके हर मुन्नीके भागमे बम फुटलबा, बम । अब हमार घरमे बहु बनकर कोही आसकत है तो ओ बिहार और उत्तर प्रदेशसे होखेली, और वोह भी पुरे दहेजके साथ, जानली?

मुन्नी आफ्नो तल्लो पेट समात्दै थ्याच्च थेचारिई ।

टिभीमा समाचार आइरहेको थियो- नागरिकता विधेयक संसदबाट बहुमतले पारित ।
….अब नेपालीसँग बिहे गर्ने विदेशी महिलाले तत्कालै नेपाली नागरिकता पाउने।


खेमलाल पहारी